ट्रेन का आविष्कार किसने किया और कब हुआ था ?

पूरे विश्व में हर साल करोड़ों लोग सफर के लिए ट्रेन का उपयोग करते हैं। आपने कभी ना कभी ट्रेन में सफर जरूर किया होगा, क्योंकि रेलगाड़ी से सफर करने में बहुत कब खर्च आता है और यह बहुत ही आरामदायक होता है। यह बहुत तेज रफ्तार और लंबी या छोटी यात्रा में लगने वाले सस्ते भाड़े के कारण यातायात का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। इन सब के बाद आपके मन में कभी ना कभी ये सवाल जरूर जरूर आया होगा की आखिर ट्रेन को किसने, कब और कैसे बनाया होगा ? Train Ka Avishkar Kisne Kiya

रेलवे (Railway) का उपयोग आज के समय दिन भर में करोड़ों लोग अपने ऑफिस, घरों, शहरों तथा पर्यटन छेत्रों में जाने के करते हैं। इसके अलावा रेलवे का सबसे ज्यादा उपयोग ज्यादा समान एक राज्य से दूसरे राज्य तक लाने और ले जाने के लिए किया जाता है।

दोस्तों आज के इस आर्टिकल मे हम जानेंगे की Rel Ka Avishkar Kisne Kiya Aur Kab Huaa Tha , train ka avishkar kisne kiya tha uska name , यह जानने के लिए आप इस लेख को पूरा पढ़ें।

ट्रेन का आविष्कार किसने किया था ?

Train ka avishkaar kisne kiya kab kiya

विश्व का पहला भाप से चलने वाला रेल इंजन रिकर्ड ट्रेविथिक (Richard Trevithick) नें 21 फरवरी 1804 में बनाया था। रिकर्ड ट्रेविथिक यूनाइटेड किंगडम (United Kingdome) में रहने वाले एक पेशावर इंजीनियर हैं। इनके द्वारा बनाया गया यह इंजन भाप से चलने वाला इंजन था। यह इंजन बनने के बाद इसका प्रयोग भी किया गया था लेकिन कई कारण के वजह से यह कई वर्षों यह सफल नहीं हो पाया।

रिकर्ड ट्रेविथिक के इस प्रयोग को देखते हुये अन्य इंजीनियरों को प्रेरणा मिली और वो लोग भी इसी कार्य को करना शुरू कर दिया। इन्हीं इंजीनियरों में से एक पेशावर जॉर्ज स्टीफेन्सन् {George Stephenson} ये इंग्लैंड के रहने वाले थे इन्होंने 27 सितंबर 1885 में दुनिया की सफल Train का आविष्कार किया था।

George Stephenson के द्वारा बनाए गए इस ट्रेन की चाल 24 घंटा प्रति किलोमीटर की थी और सबसे पहली बार इंग्लैंड में Stockton to Darlington तक 450 व्यक्तियों के साथ इसका सफल परीक्षण हुआ था। इस परीक्षण के बाद जॉर्ज स्टीफेन्स को रेलवे का जनक भी कहा जाने लगा।

ट्रेन का आविष्कार कब हुआ था ?

दुनिया में सर्वप्रथम भाप जैसे ईंधन से चलने वाला ट्रेन इंजन 21 फरवरी 1804 में रिकर्ड ट्रेविथिक के द्वारा बनाया गया था लेकिन कुछ कारणों की वजह से इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था। और फिर बाद में इसी प्रयोग से इंग्लैंड के निवासी जॉर्ज स्टीफेन्स नें 27 सितंबर 1825 में एक सफल ट्रेन का आविष्कार किया।

27 सितंबर 1825 के आविष्कार के बाद प्रयोग के समय ट्रेन 24 घंटा में एक किलोमीटर का रास्ता तय करती थी, और धीरे – धीरे इसकी प्रव्रत्ति बढ़ती रही और आज के समय में 500 किलोमीटर प्रति घंटा चलने वाली बुलेट ट्रेन भी विश्व देशों में आ चुकी है।

ट्रेन का इतिहास – History of Train

जब से रेल का आविष्कार हुआ है तब से लेकर आज तक ट्रेन के इतिहास में बहुत सारा बदलाव आ चुका है। कहाँ पहले 24 किलोमीटर प्रति घंटा के हिसाब से ट्रेनें चलती थी और धीरे धीरे बदलाव होते होते आज के समय में ट्रेन 200 – 500 किलोमीटर प्रति घंटा के हिसाब से चलने लगी है। और अब के समय में इन ट्रेनों का नेटवर्क पूरे विश्व में फैला हुआ है।

1837 से पहले सभी ट्रेनें भाप से चलती थी जिसमें कोयले का इस्तेमाल किया जाता था। उसके बाद में एक पेशावर इंजीनियर ने 1912 में डीजल से चलने वाला इंजन बनाया जो पूरी दुनिया को बहुत ही उपयोगी साबित हुआ।

इसके बाद धीरे – धीरे सभी ट्रेनों तथा इंजनों में लगातार बदलाव होते रहे और प्रयोगों के बाद सन् 1937 में रॉबर्ट डेविडसन (Robert Davidson) के द्वारा बिजली और बैटरी से चलने वाली ट्रेनों का भी आविष्कार हो गया था।

इसी तरह के निरंतर प्रयोगों के द्वारा ट्रेनों में बदलाव होते गए। और यह सारा श्रेय उन महान इंजीनियरों को जाता है जिन्होंने हमें इतना बड़ा तोहफा दिया है जिसके की आज हम बहुत ही सुविधापूर्वक कहीं भी आ और जा सकते हैं। यह टेक्नॉलजी हमारे दैनिक जीवन के लिए काफी उपयोगी और सुविधाजनक है।

भारत में ट्रेन का इतिहास –

आप तो जानते ही होंगे की सन् 1947 से पहले अपना भारत देश अंग्रेजों के के कब्जे में था, जो भारत पर राज कर रहे थे। ट्रेन का आविष्कार इंग्लैंड मे होने के कारण अंग्रेजों ने रेल का आयोजन भारत में ही किया था। जब हमारा भारत देश सन् 1947 मे आजाद हुआ था तब अंग्रेजों को हमारा भारत छोड़कर जाना पड़ा था इससे जो उनका रेल नेटवर्क था वह हमारे भारत में रह गया था, और आज हम उसी रेल नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।

भारत में सबसे पहला रेलवे लाइन का उद्घाटन शनिवार 16 अप्रैल 1853 को हुआ था, इस रेलवे लाइन की लंबाई 21 मील कि थी। इसी दिन भारत की पहली रेल मुंबई से ठाणे के बीच में चलाई गई थी, जिसे 21 तोपों की सलामी से नवाजा गया था। उस मुंबई से ठाणे के बीच चली रेलगाड़ी में लगभग 400 लोग बैठे थे जिससे बोरीबंदर से दो इंजन के द्वारा खींचा गया था।

Mumbai se thane train image

शुरुआत में मुंबई से ठाणे तक आने जाने का किराया मात्र 2 रुपए था, लेकिन फिर धीरे धीरे करके ट्रेन की कई सारी अलग अलग श्रेणिया बनाई गई और फिर उन सभी किराया बढ़ाकर 2 रुपए से 3 रुपए तक कर दिया गया।

ट्रेन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें –

  • लाइट से चलने वाला विश्व का सबसे पहले ट्रेन इंजन राबर्ट डेवीडसन ने द्वारा 1837 में बनाया गया था जो की स्कॉटलैंड के निवासी थे।
  • ट्रेनों का ट्रैक बदलने वाले रेलरोड स्विच का आविष्कार अंग्रेज सिविल इंजीनियर सर चार्ल्स डेविडसन के द्वारा सन् 1832 में किया गया था।
  • जार्ज स्टीफेन्सन से पहले रिचर्ड ट्रेविथिक ने सन् 1804 में एक स्टीम रेल इंजन का आविष्कार कर दिया था। लेकिन यह रेल इंजन कुछ कमियों की वजह से प्रसिद्ध नहीं हो पाया।
  • विश्व की सबसे पहली डीजल से चलने वाली रेल का का निर्माण सन् 1912 में स्विट्जरलैंड में हुई थी। उस रेल की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे की थी।
  • दुनिया का सबसे पुराना वोल्क इलेक्ट्रिक रेलवे इंग्लैंड के ब्राइट शहर में स्थित है। इस रेल की शुरुआत सन् 1883 में की गई थी, इसका उपयोग आज भी किया जाता है।
  • दुनिया के सबसे तेज गति से चलने वाली रेल की शुरुआत सन् 1964 में जापान के टोक्यो और ओसाका शहर की बीच में हुई थी। इस ट्रेन की अधिकतम गति 164 KM/Hr की थी।
  • ट्रेन में लगने वाले एयर ब्रेक का आविष्कार एक अमेरिकी इंजीनियर जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने सन् 1872 में किया था।
  • विश्व का सबसे पहला रेलवे ब्रिज इंग्लैंड के डार्लिंगटन शहर में स्थित स्केर्न ब्रिज में हुआ था।
  • दुनिया की सबसे पहली भूमिगत रेलवे का नाम “London Underground” है, जिसकी लंबाई लगभग 400 किलोमीटर है। इसका निर्माण 9 जनवरी 1863 में हुई थी।
  • वर्तमान समय में सबसे तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन चीन के शंघाई शहर में स्थित है इस ट्रेन का नाम शंघाई मैग्लेव है। इसकी अधिकतम रफ्तार 431 KM/Hr की है।
  • भारतिए रेल 67,368 किलोमीटर मार्ग की ज्यादा लंबाई के साथ पूरे विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है।
  • दुनिया का सबसे लंबा रेल नेटवर्क संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है इसकी लंबाई 2,50,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। अमेरिका के 80% रेल लाइन का प्रयोग माल ढोने में किया जाता है।
  • विश्व का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म भारत के उत्तर प्रदेश राज्य मे स्थित गोरखपुर स्टेशन है। जिसकी लंबाई 4,430 फीट है।
  • विश्व की सबसे लंबी रेलवे सुरंग स्विट्जरलैंड में स्थित है जिसका नाम “गोथार्ड टनल” है। यह सुरंग 57 KM. लंबा है।
  • भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग जम्मू कश्मीर में स्थित “पीर पंजाल रेलवे टनल” है। इस सुरंग की लंबाई 11.215 KM. है।

निष्कर्ष –

दोस्तों आज के समय में हम ट्रेन हमारे जीवन का एक दैनिक साधन बन चुका है, इससे हम बड़ी ही सुविधापूर्वक कहीं भी आ और जा सकते हैं। इससे समय की बचत होती है और कोई भी कार्य हमारे लिए बहुत जल्दी और आसानी से हो हो जाता है।

मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की हम आपको कम शब्दों में अच्छा से अच्छा कंटेन्ट प्रदान कर सकें जिससे की आपको पढ़ने और समझने में आसानी हो। दोस्तों मैं आशा करता हुँ की आपको आज का यह आर्टिकल ( Train Ka Avishkar Kisne Kiya ) पसंद आया होगा। इस को आप अपने दोस्तों में जरूर शेयर करना। इससे हमे बहुत प्रेरणा मिलेगी।

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